आजकल महंगाई काफी बढ़ चुकी हैं. भारत में मिडल क्लास श्रेणी के लोग और गरीब श्रेणी के लोग महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. हररोज के खर्चों को पूरा करने के लिए यह लोग दिन रात मेहनत करते रहते हैं.
अपने खर्चों को पूरा करने के बाद कुछ राशि की बचत करते हैं ताकि वो अपने सपने पुरे कर सकें. लेकिन कई आपातकालीन समस्याएँ उनकी इस बचत को एक पल में शून्य कर देती हैं. इन आपातकालीन समस्याओं में सबसे बड़ी और आर्थिक तौर पर सबसे ज्यादा असर करने वाली समस्या हैं हेल्थ की याने आरोग्य की. आजकल आरोग्य की समस्याएं बोहोत बढ़ रही हैं.
बीमारी कभी बताकर नहीं आती है और आज के दौर में बढ़ते प्रदूषण, अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें, तनावपूर्ण जीवन शैली और अधिक काम, कई गंभीर बीमारियों को आमंत्रित करते हैं. जिनका इलाज कराना काफी महंगा पड़ता हैं. ऐसे में अगर हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ जाए तो मेडिकल खर्च आपकी बचत पर भारी असर डाल सकता हैं.
सामान्य आमदनी वाले परिवार में अगर किसी व्यक्ति को बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम हो, तो स्थिति बड़ी बिकट हो जाती हैं. इलाज के लिए इकट्ठा राशि कहां से आएगी? ये सबसे बड़ा सवाल सामने आता हैं. इसी समस्या का समाधान हैं हेल्थ इन्शुरन्स. आज के इस लेख में हम हेल्थ इन्शुरन्स के बारे में विस्तार से समझेंगे.
हेल्थ इन्शुरन्स क्या हैं ?
Health insurance, ऐसी बीमा पॉलिसी हैं. जिसको लेने पर आप खुद के बीमार पड़ने पर या अपने परिवार के सदस्यों के बीमार होने पर, इलाज के खर्चों का भुगतान बीमा कंपनी से प्राप्त करते हैं. अस्पताल में भर्ती होने से लेकर, डॉक्टरों का परामर्श शुल्क, जांचों और दवाइयों का खर्च और नर्सिंग और देखभाल का खर्च इन सब खर्च की राशि हेल्थ इंश्योरेंस से मिल जाती हैं. पॉलिसी धारक मासिक प्रीमियम, सह-भुगतान (को-पैमेंट), सह-बीमा (को-इन्शुरन्स) और डिडक्टिबल्स (पॉलिसी धारक द्वारा भुगतान किया जाने वाला हिस्सा है) का भुगतान करते हैं. यह एक कॉन्ट्रैक्ट हैं, हेल्थ इंश्योरेंस अपने पॉलिसीधारकों को उनके चिकित्सा उपचार और संबंधित खर्चों जैसे कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च, कमरे के शुल्क, डॉक्टर की परामर्श शुल्क, एम्बुलेंस शुल्क, गंभीर बीमारी से संबंधित खर्च और अन्य खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस बीमाधारक और स्वास्थ्य बीमा कंपनी के बीच एक समझौता हैं, जहां बीमित व्यक्ति नियमित अंतराल पर बीमा कंपनी को प्रीमियम नामक एक निश्चित राशि का भुगतान करता हैं, और बदले में बीमा कंपनी या बीमाकर्ता वित्तीय स्वास्थ्य देखभाल कवरेज की पेशकश करता हैं.
Health Insurance और Medical Insurance में क्या अंतर हैं?
अधिकतर लोग स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा बीमा में भ्रमित हो जाते हैं. कभी-कभी हम लोग इसे एक ही समझ लेते हैं, किन्तु स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा बीमा दोनों ही अलग-अलग चीजे हैं. इन दोनों ही बीमा में सिर्फ एक समानता है, कि बीमाधारक को जरूरत के समय वित्तीय सहायता प्रदान की जाती हैं.
स्वास्थ्य बीमा यानि हेल्थ इन्शुरन्स स्वास्थ्य संबंधित स्थितियों में कवरेज प्रदान करता हैं और चिकित्सा बीमा यानि मेडिकल इन्शुरन्स आपात स्थितियों में विशिष्ट स्वास्थ्य के लिए सिमित और पूर्व-निर्धारित कवरेज की सुविधा देता हैं. मेडिकल इन्शुरन्स तुलनात्मक रूप में सस्ता होता हैं.
मेडिक्लेम पॉलिसी अस्पताल में भर्ती होने तक सभी खर्चों को कवर करती हैं. ये पॉलिसी किसी विशेष बीमारी का इलाज एक लिमिट तक पूरा करती हैं. दूसरी ओर, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लगभग सभी बीमीरियों के इलाज का खर्चा उठाती हैं. इसमें अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के कई दिनों के खर्च शामिल हैं, जैसे डायग्नोसिस, डॉक्टर कंसलटेशन फीस आदि. जबकि मेडिक्लेम में अन्य खर्चों को कवर नहीं किया जाता हैं.
मेडिकल इंश्योरेंस में पॉलिसी होल्डर्स अपनी जरूरत के हिसाब से किसी खास बीमारी के लिए अलग से ऐड ऑन या कवर जुड़वा सकते हैं. मेडिक्लेम में अलग से ऐसा कोई कवर नहीं जुड़वा सकते हैं.
मेडिक्लेम में हॉस्पिटलाइज़ेशन का खर्चा 5 लाख से ज्यादा नहीं हो सकता हैं, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस का कवरेज उम्र, जगह और घर के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता हैं.
अगर आप कम प्रीमियम देना चाहते हैं, या कम समय के लिए हेल्थ प्लान लेना चाहते हैं तो इसके लिए मेडिक्लेम अच्छा ऑप्शन हैं. क्योंकि हेल्थ इंश्योरेंस आपको ज्यादा सर्विसेज देता है इसलिए इसके प्रीमियम महंगे होते हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस क्यूँ खरीदना चाहिए
- हेल्थ इंश्योरेंस होने से आप अस्पताल भर्ती व् चिकित्सा खर्चो को बिना अपनी बचत राशि को क्षति पहुंचाते हुए पूरा कर सकते हैं.
- तत्काल अस्पताल में भर्ती बिना जेब से कुछ खर्च किए बिना हो सकती हैं.
- भारत के इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80D के अंतर्गत आप कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
- वार्षिक चेक-उप के माध्यम से आप अपने स्वास्थ्य की स्थिति जान सकते हैं.
- आप अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए भी कवरेज ले सकते हैं.
बिना इन्शुरन्स वाले लोगों को कम मेडिकल केयर और कम समय पर सही देखभाल मिल पाती हैं. उनके स्वास्थ्य के खराब होते ही बीमा की कमी उनके और उनके परिवारों के लिए एक वित्तीय बोझ बन सकती हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद यदि आपको भविष्य में चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है. तो आपको सरकारी अस्पतालों की प्रतीक्षा सूची या इलाज की लागत के लिए भुगतान करने की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रकार
अब हम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रकार बारे में विस्तार से समझते हैं.
इलाज खर्च का भुगतान देने वाली पॉलिसी
Hospitalization plans, में बीमाधारक व्यक्ति के इलाज पर आए खर्च में से, एक पहले से तय रकम ही बीमा कंपनी की ओर से चुकाई जाती हैं. किसी भी तरह की बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के इलाज में इसका लाभ मिलता हैं. ज्यादातर बीमारियों का कई बार इलाज कराया जा सकता हैं. इस पालिसी में आप बीमा पॉलिसी की Limit तक का लाभ ले सकते हैं.
गंभीर बीमारियों के इलाज का भुगतान देने वाली पॉलिसी
इस पालिसी में आपको पहले से निर्धारित कुछ गंभीर बीमारियों के पहचान होने पर और उनके इलाज संबंधी प्रक्रियाओं में एक विशिष्ट रकम दी जाती हैं. इनमे घातक बीमारियां शामिल हैं. जैसे कि हार्ट अटैक, कैंसर, लकवा आदि.
किन बीमारियों को आपके स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में शामिल करना हैं, इसको शुरुआत में ही तय कर लिया जाता हैं. बीमारी की गंभीरता के अनुसार आपकी पॉलिसी बन जाती हैं, और उसका प्रीमियम तय हो जाता हैं. इस तरह ये, benefit-based health insurance plans होते हैं.
व्यक्ति या परिवार के हिसाब से भुगतान देने वाली पॉलिसी
आप पूरे परिवार के लिए इकट्ठा family health insurance policy ले सकते हैं. तय किए हुए बीमा कवरेज के तहत परिवार के किसी भी सदस्य के इलाज में इस प्लान में मदद मिलती हैं. इसका प्रीमियम सस्ता पडता हैं.
रोजाना भुगतान वाली पॉलिसी
Daily cash benefit plan के तहत आपको इलाज के दौरान, रोजाना के हिसाब से एक तय रकम की मदद मिलती हैं.
उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने 1500 रुपए की ही defined benefit policy ले रखी हैं. और अस्पताल में भर्ती होने पर उसके के इलाज पर रोज 2000 रुपए खर्च हो रहे हैं, , तो उसे सिर्फ 1500 रुपए रोज के हिसाब से ही मदद मिलती हैं, लेकिन अगर उस पर 1000 रुपए का खर्च आ रहा हैं, तब भी उसे 1500 रुपए की मिलती हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस के फायदे
- आपत काल में अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ने वाली किसी भी मेडिकल कंडीशन को स्टेंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के तहत कवर किया जाता हैं.
- ज़्यादातर कंपनियों द्वारा अस्पताल में भर्ती होने, डायग्नोसिस और मेडिसिन वगैरह के सभी मेडिकल ख़र्चो को कवर किया जाता हैं.
- बीमारियों या अचानक लगने वाली चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले मेडिकल ख़र्च को भी हेल्थ इंश्योरेंस के र्चों में ही शामिल किया जाता हैं.अस्पताल में भर्ती होने से पहले के ख़र्च जैसे कि डायग्नोसिस ख़र्च, और डॉक्टर की फ़ीस वगैरह को हेल्थ इंश्योरेंस प्लान द्वारा कवर किया जा सकता हैं.
- डिस्चार्ज होने के बाद के ख़र्च जैसे कि मेडिसिन, रूटीन चेकअप, इंजेक्शन वगैरह का भी ज़्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां रिइंबर्समेंट प्रदान करती हैं.
- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में आईसीयू बेड चार्ज भी शामिल होते हैं. इंश्योरेंस किया गया कोई भी व्यक्ति प्राइवेट रूम में रहने का विकल्प भी चुन सकता हैं.
- मनोरोग के इलाज के लिए उचित समय पर अस्पताल में भर्ती होना भी ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत कवर किया जाता हैं.
- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी मेडिकल इमरजेंसी कंडीशन के दौरान किए गए हर एम्बुलेंस ख़र्च को कवर करती हैं.
- हेल्थ इंश्योरेंस आपके और आपके परिवार के लिए सुरक्षा का काम करता हैं.
- स्वास्थ्य बीमा होने से बीमाधारक को तनाव मुक्त होने में मदद मिलती हैं.
- भारत सरकार आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 डी के तहत स्वास्थ्य बीमा की खरीद को बढ़ावा देने के लिए कर लाभ प्रदान करती हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के लिए आवश्यक दस्तावेज
- हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम का फॉर्म
- डॉक्टर द्वारा प्रमाणित मेडिकल सर्टिफ़िकेट के साथ संलग्न डायग्नोसिस रिपोर्ट अस्पताल द्वारा अधिकृत
- बीमाधारक का आईडी प्रूफ आधार कार्ड, पासपोर्ट , वोटर आय डी कार्ड आदि.
- कैश इनवॉइस के साथ फार्मेसी/अस्पताल से प्रिस्क्रिप्शन
- दुर्घटना की स्थिति में FIR की कॉपी
संक्षेप
आज के इस लेख में हमने हेल्थ इन्शुरन्स से जुडी सारी जानकारी विस्तार से समझी। Health insurance, ऐसी बीमा पॉलिसी हैं, जिसको लेने पर आप खुद के बीमार पड़ने पर या अपने परिवार के सदस्यों के बीमार होने पर, इलाज के खर्चों का भुगतान बीमा कंपनी से प्राप्त करते हैं. आप अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए भी कवरेज ले सकते हैं. बीमारी कभी बताकर नहीं आती है और आज के दौर में बढ़ते प्रदूषण, अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें, तनावपूर्ण जीवन शैली और अधिक काम, कई गंभीर बीमारियों को आमंत्रित करते हैं. जिनका इलाज कराना काफी महंगा पड़ता हैं. ऐसे में अगर हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ जाए तो मेडिकल खर्च आपकी बचत पर भारी असर डाल सकता हैं. इसके लिए Health insurance एक अच्छा विकल्प हैं.
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